भारत का IT सेक्टर, जो कभी देश की आर्थिक प्रगति और युवाओं के रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता था, आज एक गहरे संकट से गुजर रहा है। पिछले कुछ महीनों से देश की बड़ी-बड़ी IT कंपनियाँ — जैसे TCS, Infosys, Wipro, HCL और अन्य — अपने अनुभवी कर्मचारियों को बड़ी संख्या में निकाल रही हैं। यह केवल नौकरी छूटने की कहानी नहीं है, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य पर एक गंभीर सवाल भी खड़ा करती है। IT सेक्टर मे पहले से भर्ती का कम मौका मिल रहा है | जो लोग वर्षों से काम कर रहे है उनको कंपनी यक झटके मे निकाल रही है | IT सेक्टर देश का सबसे ज्यादा नौकरी देने वाला सेक्टर है |
आपको बता दे की अभी 73 लाख कर्मचारी IT सेक्टर मे काम कर रहे है | भारत की जीडीपी मे लगभग 7 % का योगदान रहा है |
IT सेक्टर निर्यात 2025 मे 19 लाख 70 हजार करोड़ पहुच गया था |
पिछली तिमाही के मुकाबले :-
टॉप 6 IT company . | नई भारतीयों मे 72 % गिरावट |
करोना काल के बाद एंट्री लेवल पर भर्ती मे 50 % गिरावट | अगर सीधे ये समझे की जो टॉप लेवल company है जो एंट्री लेवल पर नए युवा को 100 नौकरी दे रही थी वही अब 50 नौकरी दे रही है |
आपको बता दे की भारत के IT सेक्टर का 60% Revenue अमेरिका से आता है | और बाकी 30 % यूरोप से आता था |
अब तक कितने कर्मचारियों को निकाला जा चुका है |
आपकी जानकारी के लिए बता दे की Intel (इंटेल), Microsoft (माइक्रोसॉफ्ट), Meta (मेटा) जैसी बड़ी कम्पनी पूरी दुनिया मे करीबन 60,000 कर्मचरियों को निकाल चुकी है |
TCS (TATA) ने जुलाई 2025 मे The Times of India के रिपोर्ट के मुताबिक करीबन 12,000 कर्मचारी निकाले | जो की एक बहुत बड़ा number है | TCS ने जो employee निकले है वो mid-level के Engineer थे | जिनके पास 15 से 20 साल का Experience था | TCS का कहना है की इनके पास skills नहीं है |
12 महीने के भीतर टॉप 7 आईटी company ने 7,700 कर्मचारियों को निकाल जिनके पास 15 साल से ज्यादा के अनुभव था |
क्या कहा infosys के Co-Founder ने |
इन सभी मामलों पर Infosys के co-Founder Nandan Nilekani का कहना है की हमारी इंडियन IT सेक्टर service देने मे इतना पागल हो गई की इन्होंने अपना खुद का प्रोडक्ट बनाना ही भूल गया |
आपको बता दे की पिछले 6 सालों मे भारत मे 550 Engineering College बंद हो चुके है |
क्यों आई ऐसी स्थिति?
- वैश्विक मंदी (Global Recession):
अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में आर्थिक सुस्ती के कारण विदेशी प्रोजेक्ट्स की मांग घटी है। IT सेक्टर का एक बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट आधारित होने के कारण इसका सीधा असर भारतीय कंपनियों पर पड़ा है। - AI और Automation का बढ़ता प्रभाव:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन अब कई पारंपरिक नौकरियों को रिप्लेस कर रहे हैं। जहां पहले 10 लोग किसी प्रोजेक्ट पर काम करते थे, अब वही काम कुछ टूल्स या सॉफ्टवेयर के जरिए पूरा हो रहा है। - Cost Cutting Strategy:
कई कंपनियाँ अब अपने खर्चों को कम करने के लिए पुराने और हाई सैलरी वाले कर्मचारियों को निकालकर फ्रेशर्स या कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड कर्मचारियों को हायर कर रही हैं। - यूक्रेन युद्ध : कुछ लोगों का मानना है की रसिया और यूक्रेन के युद्ध से भी इसपर असर पड़ा है |
कर्मचारियों पर असर
- नौकरी छूटने से कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
- नए प्रोजेक्ट्स की कमी के कारण कई इंजीनियर bench पर हैं।
- मानसिक तनाव और करियर को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ है।
भविष्य की दिशा
भले ही यह समय कठिन हो, लेकिन तकनीक के बदलते दौर में नई स्किल्स सीखना ही बचाव का रास्ता है। जो की लोगों के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है |
- AI, Cloud Computing, Cybersecurity, Data Analytics जैसी फील्ड्स तेजी से उभर रही हैं।
- जो कर्मचारी इन नई टेक्नोलॉजीज को सीखेंगे, वे आने वाले समय में सबसे ज्यादा डिमांड में रहेंगे।
निष्कर्ष (Conclusion)
भारतीय IT सेक्टर का यह संकट स्थायी नहीं है, लेकिन यह एक चेतावनी जरूर है — समय बदल रहा है और हमें भी अपने स्किल्स को समय के साथ बदलना होगा। भारत की टेक इंडस्ट्री में फिर से उभरने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि हम बदलाव को स्वीकार करें और खुद को भविष्य के लिए तैयार करें। और समय के साथ न्यू स्किल्स सीखने पर ध्यान देना चाहिए |



